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अचानक से मिली वो मुझे

by satyadeo
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अचानक से मिली वो मुझे ….
जैसे लगा वो तुम हीं हो….

ढूंढने लगा दिल की धधक से उस में तुम्हें ….
वो नयन ,नख्श सब तराशा …
पर तुम नहीं वो तो कोई और थी …

तुम कहाँ इस अनजान सी शहर में होती
जहाँ मैं अनजान हूँ ,लोग मुझ से अनजान हैं

तुम तो वहीं मिलती हो अपने शहर में …
जहाँ वो तुम्हारे घर की गली ,सड़क,चौक -चौराहे पर ..

मेरे ऊपर छोटी सी मुस्कान बिखरते हुए…
चंद पलों के लिए समाज और संस्करा से छुप -छुपाकर

की कहीं कोई देख न ले ,सरेआम न हो जाऊँ ..
इसी तरह तो प्यार जताती हो तुम,,
खुदा कसम मेरे से दूर रहकर ,
मुझे और मेरे रिश्ते को ऐसे हीं निभाती हो तुम ….

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