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तुम किताब -सी होती मैं पन्नों -सा पढ़ता

by SATYADEO KUMAR
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सत्यदेव कुमार

तुम किताब- सी होती
मैं तुम्हें पन्नों -सा पढ़ता
तुम जिंदगी की हिसाब -सी होती
मैं तुम्हें किताब -सा लिखता

गुलाब -सी तुम होती
इत्र -सा मैं महकता
फूल -सी खिली तुम होती
भौरों -सा मैं चहकता

सूर्य -सा मैं निखरता
चाँद -सी तुम सबरती
सागर सा मैं गरजता
नदी -सी तुम गुनगुनाती

आसमाँ -सी तुम चमकती
धरा -सा तुम पे खुद को लुटाता
शाम- सी मुझ में तुम ढलती
दिन -सा तुम में मैं निकलता

तूम मुझे देख मुस्कुराती
मैं तुम्हें देख गजलें बनाता
तुम किताब- सी होती
मैं तुम्हें पन्नों -सा पढ़ता

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