Home POEM तुम बड़े हो गये हो ,कहकर छीन लिया बचप्पन

तुम बड़े हो गये हो ,कहकर छीन लिया बचप्पन

by SATYADEO KUMAR
0 comment

तुम बड़े हो गये हो कहकर छीन लिया बच्चपन
   पर हमने खुलकर जिया नही
ये पूछते रहती है चेहरे से  दर्पण
तुम बड़े हो गये हो कहकर …………

अब भी ,मंजिल की राही को बुलाती है ” आँगन
  खेल -खिलाऊँ ,गीत सुनाऊँ
झूलें के डोरी तान तेरे लिए बन जाऊँ , सावन
   तुम बड़े हो गये हो कहकर..…………
 
मन ,मंजिल के लिए भटक गया है
  मैं ना लौट पाऊँ आँगन
प्यार सिखाई ,प्रीत सिखाई,और संघर्ष भरा है जीवन
मेरे संघर्ष की सफलता पे ,तु फिर झूम उठेगी आँगन
और मैं यूँही लौट तुम्हें चुम लूँ  “आँगन”
तुम बड़े हो गये हो कहकर..…………

यादों में तुम्हारे साथ खिलखिलाता हूँ
तुम्हारे कोने में छिपने का एहसास किताबों में दुहराता हूँ
अब तो खूद से रूठता हूँ ,खुद को ही मनाता हूँ
तेरे मिट्टी की यादों में और क्या सुनाऊँ ,,आँगन
तुम बड़े हो गये हो कहकर………

बङे होने की नशे में ,
खुद को खूद ही बड़ा समझ लिया बच्चपन
तुम बड़े हो गये हो कहकर..छीन लिया बच्चपन

You may also like

Leave a Comment