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पत्थरों की आवाज गूँज रही है

by satyadeo
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पत्थरों की आवाज गूँज रही है

 

पत्थरों की आवाज गूँज रही है

पत्थरों की आवाज गूँज रही है

पत्थरों की आवाज गूँज रही है
सुनो चुप हो जाओ
ये जनता है नाराज घूम रही है

जोर की शोर -शराबा है
गंदी है ,अच्छी है , बुरी है
सुनो ,डूब मरो ,शर्म करो ,हाय ,हाय
ये जनता है ,हाथ में इन्कलाब घूम रही है

जताना है ,चेताना है ,समझाना है , दबाना है
अपील है ….शांति बनाये रखो
पर ये पुलिस है, गोली ,लाठी ,बारूद …..
इन्हें कर्तव्य भी निभाना है …

मीडिया है ,सड़क है ,संसद है
आवाज है ,चलो मत ,समस्या का निदान है या जड़ है
लोग हैं ,समाज है ,धर्म है , राजनीति है
बुरे हैं या अच्छे हैं ,हाँ गंदी है ,गंदी है ,गंदी है

जनता है ..विरोध है ,समझ है या नासमझ है
चिंता हैं हीं क्या इन्हें .भूख है ,तड़प है ,प्यास है
पर फिक्र है इन्हें ,जात है ,धर्म है, मंदिर है ,मस्जिद है

नेता हैं ,देश के बेटा हैं ,हमारी सरकार है
कलंकित है , चिंतित हैं , बेकार है
सच कहोगे चुप रहो ,……
हम सभी देश के पहरेदार हैं

देश है चल रहा है …….
फिर कथा सुनाते हैं
पत्थरों की आवाज गूँज रही है

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