Home POEM यादों का किताबें बन गई है जिंदगी …..सत्यदेव कुमार

यादों का किताबें बन गई है जिंदगी …..सत्यदेव कुमार

by SATYADEO KUMAR
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जमाने पहले -एक सफेद कागज- सी थी ऐ -जिंदगी ।
पर अब यादों का किताबें बन गई  ऐ-जिंदगी ।

तुम इतना सफेद थी- एक सच्चाई की तरह
और तुझ से  हर कोई करना चाहता था – बंदगी
पर पहले खूद के जज्बातों ने तुझे पे उकेर दिया ऐ -जिंदगी
अब तो सिलसिला चली हर कोई लिखता चला गया
और यादों का किताबें बन गई  ऐ-जिंदगी

किसी ने मुस्कुराया ,किसी ने जताया
किसी ने अपना बनाया ,किसी ने ठुकराया ।
इस हर किसी के चक्कर में कहानी बन गई ऐ- जिंदगी
जिंदा हूँ और जिंदगानी बन गई ऐ -जिंदगी
 यादों का किताबें बन गई ऐ-जिंदगी ।
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तू दर्द है उन जज्बातों का –
जो सफेद कागज पर गजल बन गई -ऐ जिंदगी
पता नहीं लोग रोज ये कहते हैं -तुम और खूबसूरत हो
इस तरह खूद को जिंदा रखने की आदत बन गई हो ऐ-जिंदगी
हाँ जमाने पहले एक सफेद कागज -सी थी -जिंदगी
अब यादों का किताबें बन गई हो ऐ-जिंदगी ।

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