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राजनेताओं के राजनीत से देश शर्मिंदा है

by SATYADEO KUMAR
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सत्यदेव कुमार

राजनेताओं के राजनीत से देश शर्मिंदा है
मौन अगर वो देश हित पर ,तो समझो वो दरिंदा है

बाँट देते तुम्हें वो अपने ही घर में
मानों जैसे लोग पर-देश का परिंदा है
मौन अगर वो देश हित पर ,तो समझो वो दरिंदा है

तुम इनके साजिशों को शिकार हो
तुम अपने में लड़-झकड़कर इनके सत्ता के यार हो
लगता है तुम राजनीत के चंद-सिक्के के हकदार हो
क्या आप इसी गन्दे राजनीत का बाशिंदे हैं
मौन अगर वो….

ये सियाशी भेड़ियाँ हैं
जो नोच खाते हैं तुम्हें ,ऐसी इनकी वादे की बेड़ियाँ हैं
तुम इनके लिए सिर्फ चुनाव में सज्जती हुई बाजार हो
और दिनों में तुम सिर्फ इनके फायदे की बाजार हो
आखिर तुम्हारे ये नुमाइंदे हैं
मौन अगर वो ..

इनका माने तो लजाती है जनता
अपने हित पर भी नहीं आँख मिलाती है जनता
पूजा की दीपक की तरह धर्म में बुझ जाती है जनता
खूद ही हाथों से विनाश की मुहर लगाती है जनता
सोचो -समझो यही इनके धंधे हैं
मौन अगर वो देश हित पर,तो समझो वो दरिंदें हैं

राजनेताओं के राजनीत से देश शर्मिंदा है
मौन अगर वो देश हित पर ,तो समझो वो दरिंदा है

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