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वो मुझ से लिपट कर रोती रही …सत्यदेव कुमार

by SATYADEO KUMAR
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वो मुझ से लिपट कर रोती रही
अपनें हीं दिये जख्मों को ।
अपनें आँसू से धोती रही ।
मैं चुप सा खड़ा रहा जाहिल ।
वो अपनें यादों मेरे बाहों में सँजोती रही
वो मुझ से लिपट कर रोती रही।

कुशूर था उसका ,बात ,नासूर था उसका ।
जो हमें आबाद मोहब्बत का दुहाही देती रही
चुभन नहीं हूँ मैं ।
ये कहकर मेरे दिल में दखल देती रही
और वो मुझ से लिपट कर रोती रही

जब मैं अपना लिया उसे ।
तो मुझे वो बार -बार मेरी हीं सौतन की सजा देती रही
वो मुझ से लिपट कर रोती रही।

? (सत्यदेव कुमार)?

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