Home POEM मैं उनका शहर बना, वो मेरी गाँव हो गई ।

मैं उनका शहर बना, वो मेरी गाँव हो गई ।

by satyadeo
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शहर और गाँव

मैं उनका शहर बना
वो मेरी गाँव हो गई ।
मैं उनका शहरी छत बना
वो मेरे लिए पीपल की छाँव हो गई

मैं उनके शहर का सिर्फ एक अधिकारी बना
और वो मेरी गाँव की प्रधान हो गई
मैं सिमट कर चौक-चौरा हुआ
वो खेत -खलिहान हो गई

मैं उनसे “हेलो “हाइ “में रहा
वो हमें अजी सुनते हो “कहकर ”
गाँव की महतमाईन (मालकिन) गई
मैं उनका शहर बना
वो मेरी गाँव हो गई….

मैं माँ-बाप से सास -ससुर का ताना सुनाता रहा
वो अपने सास -ससुर के लिए महान हो गई
पर अच्छा है ….मैं उनका शहर बना ..
वो मेरी गाँव हो गई

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