Home SHAYARI सजता हुआ बाजार आँखों से निकल गये

सजता हुआ बाजार आँखों से निकल गये

by SATYADEO KUMAR
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सत्यदेव कुमार

सजता हुआ कितने बाजार आँखों से निकल गये
उठाता हुआ कितने सवाल जज्बातों से निकल गये
बहुत चुप रहा ये दिल तेरे हर नादानी पर
और उठा जब अनुरोध पर क्रोध का धुआं –
तो तेरा दिये दर्द का वो एहसास आँखों से निकल गये

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